तेरा निशां हर शय मे मिला है
हर पल तेरा ज़मज़म से धुला है
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी तू रहमत है ज़िन्दगी,
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी..
तू है इश्क हर घडी..
वोह जिया सौ जनम जिसने जी एक ख़ुशी
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी तू रहमत है ज़िन्दगी,
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी..
उन्स की एक लौ आंधियो मे जली
क्या है यह फलसफा क्या है जादूगरी
इश्क जो ठान ले फिर कहा हध कोई
रूह्ह मे तू घुली..
बनके एक कारवा धडकनो मे चली
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी तू रहमत है ज़िन्दगी,
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी..
उम्र भर की लगन का है हासिल कोई
आशिकि वोह हुई जो अधूरी रही
एक तेरे सामने क्या बिसाद है मेरी
अब रहे ना रहे..
तुझको यू जी लिया जी सके ना कोई
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी तू रहमत है ज़िन्दगी,
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी..
तेरा निशां हर शय मे मिला है
हर पल तेरा ज़मज़म से धुला है
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी तू रहमत है ज़िन्दगी,
जाहिरी फ़ज़ले रब्बी..
|
| This lyrics |
Print |
Send / Dedicate to someone |
|
|
|
Related Lyrics
|