एक दिन फुर्सत मे थामे हाथ हमारे
ले गयी उस डगर पे जहा रहती है बहारे
चल दिया हम भी घर से हम के कुछ बेफिक्र से
दिल था अपने भरोसे हम थे दिल के सहारे
एक दिन फुर्सत मे थामे हाथ हमारे
ले गयी उस डगर पे जहा रहती है बहारे
राह मे मोड़ आया रोशनी हो गयी कम..
कुछ दिल घबराया के कहा आ गए हम
आगे उस मोड़ के भी तोह बहारे नही थी..
भूले कुछ ख्वाहिशे और ख्वाब थे बधावाज़
एक दिन फुर्सत मे थामे हाथ हमारे
ले गयी उस डगर पे जहा रहती है बहारे
बेवजह लग रही थी जब तलाश हमारी..
एक खुशबू उठी और रूट बदल गयी सारी
सामने तोह खड़े थे फैला के बाहे..
जैसे हर दर्द मेरा खुद मे रोके समाये
दिल बड़ा मुख़्तसर था तेरे सीने पे सर था
यू लगा मर ना जाए इतनी खुशियो के मारे
एक दिन फुर्सत मे थामे हाथ हमारे,
ले गयी उस डगर पे जहा रहती है बहारे..
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