सियाही मे घुल गया अंधेरो मे धुल गया,
छोड़ गयी रोशनी वे रब्बा तू ना छोड़ना,
मौला मूह ना मोदना तू मुझसे मूह ना मोड़ना..,..
पल पल राग मेरा नाम तेरा एक चिराग है
तेरी पाक नज़रो मे मेरी चादर बेदाग़ है
टूटे खिलौने को अब क्या और तोड़ना
मौला मूह ना मोदना तू मुझसे मूह ना मोड़ना..
खुद को करके तेरे ही हवाले चल रहा हू मै
बुझाते बुझाते तेरी रहमतो से जल रहा हू मै
सिखा अन्धेरोसे मैने हाथ जोड़ना
मौला मूह ना मोदना तू मुझसे मूह ना मोड़ना..
सियाही मे घुल गया अंधेरो मे धुल गया
छोड़ गयी रोशनी वे रब्बा तू ना छोड़ना
मौला मूह ना मोदना तू मुझसे मूह ना मोड़ना..
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