चल रही है सांसे बह रहा है लहू..
फिर भी क्यू नही लगता
के मै ज़िंदा हू....
क्या मै जिंदा हू
सीने मे है क्यू ये जलन रूह तदप्ती है क्यू..
धड़कता दिल पूछता है
क्या मै ज़िंदा हू......
बातो की खामोशी से दोस्त की तनहाई से
भीड़ मे अकेला हू क्या मै ज़िंदा हू..
क्या मै जिंदा हू......
ये सुनी अंधेरी बेकरारी जाना पहचाना धुन्धती है क्यू
मिटा हुआ नामोनिशान पूछता है
क्या मै जिन्दा हू........
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