मासूम चेहरा निगाहे फरेबी,
लबो पे हसनी और दिल मे दगा है..
मिले दोस्त जिसको यहां तेरे जैसा..
उसे दुश्मनो की ज़रुरत है क्या है
मासूम चेहरा दगा है
दिल तोड़ दिया, क्यो इतना बता दे,
फिर बाद मे बेवफा जो चाहे मुझको सजा दे..
तेरी बेरुखी से परेशान हू मे ..
ना आये समझ मे ये क्या माजरा है
मासूम चेहरा दगा है
क्या उसको कहे जो कसमो को भूले
अपनो से करके जफा, गैरो की बाहो मे झूले
नज़र मे बसा के नज़र फेर लेना..
ये कैसी मोहब्बत ये कैसी वफ़ा है
मासूम चेहरा दगा है
जो भरता नही वोह ज़ख्म दिया है
मुझको नही प्यार को, बदनाम तुने किया है..
जिसे मैने पूजा मसीहा बना के..
ना था ये पता पत्थरो का बना है
मासूम दगा है
मिले दोस्त जिसको यहा तेरे जैसा
उसे दुश्मनो की ज़रुरत है क्या है
मासूम चेहरा दगा है
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