दिल ले गया
दिल ले गया परदेसी कोई रोक ना था..
क्या होगा होगा होगा मेरा सोचना था
ओ क्या होगा होगा होगा मेरा सोचना था
क्या होगा होगा होगा मेरा सोचना था...
दिल ले गया सोचना था
आग क्यो लगाये भला सर्द सर्द पानी मे,
क्यो मुझे जलाए ऐसे तू भरी जवानी मे..
तनहा तड़प के ऐसे कही मर ना जाऊ मे
क्या है बेकरारी मेरी कैसे यह बताओ मे
क्या हो गया
क्या हो गया कब कैसे मुझे होश ना था..
क्या होगा होगा होगा मेरा सोचना था..
एक दुसरे को दिलबर ऐसे आजमाने मे,
उम्र बीत जाये ना उह रूठने मानाने मे..
दूर जितना जाएगा तू पास उतना आऊगी
बाजू मे तेरी सारी ज़िन्दगी बीतओगी
चाहा तुझे
चाहा तुझे जो मैने मेरा दोष ना था..
क्या होगा होगा होगा मेरा सोचना था
ओ क्या होगा होगा होगा मेरा सोचना था
दिल ले गया परदेसी कोई रोक ना था..
क्या होगा होगा होगा मेरा सोचना था
ओ क्या होगा होगा होगा मेरा सोचना था
क्या होगा होगा होगा मेरा सोचना था...
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