पल पल कोई पागलपन क्यू होता है
सन सन यह तन धक धक ये मन क्यू होता है
क्यू रंग नए लगते है, क्यू ढंग नए लगते है
क्यू ऐसे महक जाते है, क्यू अंग नए लगते है
कोई ये ना जाना, क्यू होता है दिल दीवाना
क्यू होता है दिल दीवाना, कोई ये ना जाना
क्यू जागती आंखो मे भी खाब आते है
क्यू मै गौ तोह ये पथ्थर भी गाते है
क्यू लगते है उजाले उजाले ये दिन सारे
क्यू शाम को दिल मे दीपक से जल जाते है
क्यू रात पिघल जाती है, क्यू कोई घटा छाती है
क्यू दिल करता है तमन्ना, क्यू नींद नही आती है
कोई यह न जाना, क्यू होता है दिल दीवाना
क्यू होता है दिल दीवाना, कोई ये ना जाना
क्यू होतो पे इक नाम हमेशा रहता है
क्यू सच लगता है संग वोह जो भी कहता है
क्यू अरमानो की बारिश सी होती है
क्यू सपनो का इक दरिया सा बहता है
क्यू चाल बहक जाती है, क्यू सांस लहक जाती है
क्यू जल उठाते है तन मन, क्यू आग देहक जाती है
कोई ये ना जाना, क्यू होता है दिल दीवाना
क्यू होता है दिल दीवाना, कोई ये ना जाना
पल पल कोई पागलपन क्यू होता है
सन सन ये तन धक धक ये मन क्यू होता है
क्यू रंग नए लगते है, क्यू ढंग नए लगते है
क्यू ऐसे महक जाते है, क्यू अंग नए लगते है
कोई ये ना जाना, क्यू होता है दिल दीवाना
क्यू होता है दिल दीवाना, कोई ये ना जाना
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