मुझे ले चलो, आज फिर उस गली मे,
जहा पहेले पहेले ये दिल लड्कदाया,
वो दुनिया वोह मेरी, मोहोब्बत की दुनिया,
जहा से मे बेताबिया ले के आया,
मुझे ले चलो...
जहा सो रही है, मेरी जिन्दगानी,
जहा छोड़ आया, मे अपनी जवानी,
वहा आज भी एक चोकट मे ताज़ा,
मोहोब्बत के सजदो, की होगी निशानी..
मुझे ले चलो...
वोह दुनिया जहा, उसके नक्श-ए-कदम है,
वहीं मेरे खुशिया, वही मेरे गम है,
मे ले आउगा खाख, उस रहगुज़र की,
के उस रहगुज़र के, थो जार-ए-सनम है..
मुझे ले चलो...
वहा एक रंगीन, चिलमन के पीछे,
चुमकता हुवा उसका, रुक्सार होगा,
बसालूगा आंखो मे, वोह रौशनी मे,
यूही कुछ इलाज-ए-दिल-ए-जार होगा..
मुझे ले चलो...
मुझे ले चलो, आज उस गली मे,
जहा पहेले पहेले ये दिल लड्खदाया,
वो दुनिया वोह मेरी, मोहोब्बत की दुनिया,
जहा से मे बेताबिया ले के आया,
मुझे ले चलो...
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