लोग कहते है मे शराबी हू
तुमने भी शायद येही सोच लिया हा...
लोग कहते है मे शराबी हू
किसीपे हुस्न का गुरूर जवानी का नशा
किसीके दिल पे मोहब्बत की रवानी का नशा
किसीको देखके सांसो से उभरता है नशा
बिना पिए भी कही हद से गुज़रता है नशा
नशे मे कौन नही है मुझे बताओ ज़रा
किसे है होश मेरे सामने तो लाओ ज़रा
नशा है सब पे मगर रंग नशे का है जुदा
खिली खिली हुई सुबह पे है शबनम का नशा
हवा पे खुशबू का बदल पे है रिमझिम का नशा
कही सुरूर है खुशियो का कही ग़म का नशा
नशा शराब मे होता तो नाचती बोतल
मैकदे झूमते पैमानो मे होती हलचल
नशा शराब मे होता तो नाचती बोतल
नशे मे कौन नही है मुझे बताओ ज़रा
लोग कहते है मे शराबी हू...
थोड़ी आंखो से पिला दे रे सजनी दीवानी
तुझे मे तुझे मे
तुझे नौलखा मागा दूगा सजनी दीवानी...
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