कभी ना कभी,
कही ना कही,
कोइ ना कोइ तो आयेगा
अपना मुझे बनाएगा,
दिल मे मुझे बसाएगा
कब से तनहा घूम रहा हू, दुनिया के वीराने मे
खाली जाम लिए बैठा हू कब से इस मयखाने मे
कोइ तो होगा मेरा साकी, कोइ तो प्यास बुझाएगा
कभी ना कभी,
कही ना कही,
कोइ ना कोइ तो आयेगा
अपना मुझे बनाएगा,
दिल मे मुझे बसाएगा
किसी ने मेरा दिल ना देखा, ना दिल का पैगाम सूना
मुझ को बस आवारा समझा, जिस ने मेरा नाम सूना
अब तक तो सब ने ठुकराया, कोइ तो पास बिठाएगा
कभी ना कभी,
कही ना कही,
कोइ ना कोइ तो आयेगा
अपना मुझे बनाएगा,
दिल मे मुझे बसाएगा
कभी तो देगा सन्नाटे मे, प्यार भरी आवाज़ कोइ
कौन ये जाने कब मिल जाए रस्ते मे हमराज़ कोइ
मेरे दिल का दर्द समझकर दो आंसू तो बहायेगा
कभी ना कभी,
कही ना कही,
कोइ ना कोइ तो आयेगा
अपना मुझे बनाएगा,
दिल मे मुझे बसाएगा
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