जहा चार यार मिल जाए वही रात हो गुलज़ार
महफ़िल रंगीन जमे धूम मचे दौर चले
मस्त मस्त नज़र देखे नए चमत्कार
जहा चार यार...
ओने ओ क्लोच्क इन माय हाउस
तेरे वास अ काट तेरे वास अ मौसे
खेल रहे थे डंडा गिल्ली
चूहा आगे पीछे बिल्ली
चूहे को पद गए जान के लाले
बोला मुझको कोई बचाले
मेरे पास था भरा गिलास
पी गया चूहा सारी व्हिस्की
कड़क के बोला कहा है बिल्ली
दम दबाके बिल्ली भागी
चूहे की फुटी किस्मत जागी
खेल रिस्की था व्हिस्की ने किया बेडा पार
महफ़िल रंगीन जमे...
एक था हुसबंद इक थी विफे
मिसेराब्ले थी उनकी लाइफ
दृन्कार्ड हुसबंद फिघ्टर विफे
रोज़ के झगडे रोज़ के लफड़े
लफड़े झगडे, झगडे लफड़े
बीवी की थी एक सहेली
उसने उसको कुछ समझाया
तब बीवी की समझ मे आया
रात को हुसबंद पीकर आया
दरवाज़े पे फिर चिल्लाया
उस दिन बीवी बन गयी भोली
कुण्डी खोली हसके बोली
जानेमन ज़रा अन्दर तो आओ
पहले तो कुछ खाओ वाओ
फिर बिस्तर पे होगी बाते
बड़े प्यार से कटेगी राते
हुसबंद चौका , ये भूले से मे किसके घर आ गया यार
मेरी बीवी मुझे दे नही सकती, कभी इतना प्यार
हुसबंद बिस्तर छोड़ के भागा
कुण्डी ताला तोड़ के भागा
बोला देवी मुझे माफ़ कीजिये
मेरे साथ ज़रा इन्साफ कीजिय
मुझको अपने घर जाना है
वरना बीवी फिर मारेगी
तब बिविकी समझ मे आया
पीना छूट गया बिवीने इतना दिया प्यार
फिर दोनो ऐसे मिले प्यार मे ही डूब गए
प्यार अगर मिले तो हर नशा है बेकार
जहा चार यार...
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