मेहंदी लेघ घी तेरा हाथ..
दोलख बझ घी सारी रात
जख का तुम सजन का साथ
बूल ना जहाना ये दिन रात
तुजा को दिस पिया का बाह्य
तेरा पिया तेरा गुण गयिया
आया कुशियो की बर्थ
लाक रंगहो की रात
मेहंदी लेघ घी तेरा हाथ
दोलख बझ घी सारी रात.
कंगना जब बह्यू मै कहना
बोला ये दिल तेरा पी मेनका
जाया का करो ना कोई बात
सब ना जन लिया है ये जज्बाथ
मेहंदी लेघ घी तेरा हाथ
दोलख बझ घी सारी रात
तेरा गौगेथ जो ओथ्यिया
रूब तेरा सह्या ना पाया
चांद को वो बूल जाया देखा तेरा संगर
मेहंदी लेघ घी तेरा हाथ
दोलख नाझा घी सारी रात
तेरा मठ का ये जुमेर
बुला पिया का मठ कू छु कर
सजन सुन लू मेरी बात
जेवण बेर का है ये साथ
मेहंदी लेघ घी तेरा हाथ
दोलख बझा घी सारी रात
मेहंदी लेघ घी,
दोल्क बझा घी..
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