रातो की तन्हाई मे
सुबहो की परछाई मे,
चेहरा है क्या, ये मेरी आंखो मे
खुशबू है क्या, ये मेरी सास्सो मे
कैसा यह राज़ है, जो के खुलता नही
क्यू मेरे ज़हन मे, तू है ए अजनबी
होता है जो सवालो मे
मिलता नही जवाबो मे
रहता है जो खयालो मे
अब तक है वोह हिजाबो मे
है दिल का यह, कैसा मौसम
ना धुप है, ना है शबनम,
कैसा यह राज़ है, जो के खुलता नही
क्यू मेरे ज़हन मे, तू है ए अजनबी
रातो की तन्हाई मे
सुबहो की परछाई मे,
चेहरा है क्या, ये मेरी आंखो मे
खुशबू है क्या, ये मेरी सास्सो मे
जाने है क्या सितारो मे
गर्दिश सी है इशारो मै
पत्झड सी है बहारो मै
तूफ़ान सा है किनारो मे
दस्तक सी है, क्या ये हरदम
आहात सी है, क्या ये हरदम,
कैसा ये राज़ है, जो के खुलता नही
क्यू मेरे ज़हन मे, तू है ए अजनबी
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