सूरज मेरी खिड़की जो है झाकता, किरणो को जैसे मिल गया है रास्ता
हस्ती हुई आ गई ओऊ, कमरे मे जितनी नींद थी उड़ गई
उम्मीद जाते जाते वापस मुद गई, लौट आई है फिर यहि
जाने यह सब क्या है, जो भी है नया सा है
पैरो टेल दिल खो गया, यह आज क्या हो गाया
दिन युही बदलने को है, ज़िन्दगी सवारे को है
जाने क्यो यह मुझको है लगा, लचकी है जो दिल की डाली
कलियां अब्ब है खिलने वाली, हाले हौले पास आके
धीमे से गाये हवाएं, जाने यह सब क्या है
जो भी है नया सा है, पैरो टेल दिल खो गया, यह आज क्या हो गया
सच बरी बरी होरहे सब ख्वाब है
पंछी उड़न भरने को बेताब है
आंखो मे है आसमान ओऊ
रेशम के जैसे नरमी है हर बात मे
उजले है दिन और चांदनी है रात मे
हर लम्हा है मेरबान
जाने यह सब क्या है, जो भी है नया सा है
पैरो टेल दिल खो गया, यह आज क्या हो गया
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