बगिया बगिया बालक भागे, तेत्तली फिर भी हाथ न लगे
इस पगले को कौन बताये, ढून्ढ रहा जो तू जग मे
कोई जो पाए तो, मान मे ही पाए
सपनो से भरे नैना, तो नींद है ना छाइना
ऐसे डगर कोई अगर जो अपनाये
हर राह के वोह अनत पे रस्ते ही पाए
धुप का रास्ता जो फेले जलाये
मोड़ तो आये छाऊ ना आये
राही जो चलता है चलता ही जाए
कोई नही है जो कही उसे समझाए
सपनो से भरे नैना, तो नींद है ना चाइना
नैना रे
दूर से ही सागर जिसे हर कोई माने
पानी है वोह या रेत है यह कौन जाने
जैसे के दिन से रैन अलग है
सुख है अलग है और चैन अलग है
पैर यह जो देखे वोह नैन अलग है
चैन तो है अपना सुख है पराये
सपनो से भरे नैना, तो नींद है न छाइना
सपनो से भरे नैना, नैना नैना नैना रे
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