ए एक वक़्त की बात बताये, एक वक़्त की,
जब शेहेर हमारा सो गयो थो, वो राज गजब की
हे चाहू और सब ओरे दिशा से लाली चाई रे
जुगनी नाचे चुनर ओढ़े, खून नहाई रे
सब ओरो गुलाल पुट गयो, सब ओरो मे
हेय्य्य सब ओरो गुलाल पुट गयो, विपदा चाई रे
जिस रात गगन से खून की बारिश आई रे,
जिस रात शेहेर मे खून की बारिश आई रे..
सराबोर हो गयो शेहेर और सराबोर हो गयी धरा
सराबोर हो गयो रे जत्था इंसानो का बड़ा बड़ा
सभी जगत यह पूछे था, जब इतना सब कुछ हो रियो थो
तो शेहेर हमारा कहे भाईसाब आंख मूड के सो रियो थो
तो शेहेर यह बोलियो नींद गजब की ऐसी आई रे
जिस रात गगन से खून की बारिश आई रे
जिस रात शेहेर मे खून की बारिश आई रे
सानता विराना ख़ामोशी अनजानी
ज़िन्दगी लेती है करवाते तूफानी
घिरते है साए घनेहरे से
रूखे बालो को बिखेरे से
बढ़ते है अंधेरे पिशाचो से
कांपे है जी उनके नाचो से
कही पे वो जूतो की ख़त ख़त है
कही पे अलावो की चाट पट है
कही पे है झींगुर की आवाजे
कही पे वो नलके की ताप ताप है
कही पे वो काली सी खिड़की है
कही वो अंधेरी सी चिमनी है
कही हिलते पेड़ो का जत्था है
कही कुछ मुंडेरो पे रक्खा है
सुनसान गल्ली के नुकाद पे जो कोई कुत्ता
चीख चीख कर रोता है
जब लंप पोस्ट की गंदली पिल्ली, घुप रौशनी
मे कुछ कुछ सा होता है
जब कोई साया खुद को थोडा बचा बचा कर
गम सायो मे खोता है
जब पूल के खम्भो को गाडी का गर्म उजाला
धीमे धीमे धोता है
तब शेहेर हमारा सोता है ,
जब शेहेर हमारा सोता है
तो मालूम तुमको, हा क्या क्या होता है
इधर जागती है लाशे, जिंदा हो मुर्दा
उधर ज़िन्दगी खोता है
इधर चीखती है दहा
खैराती उस अस्पताल मे बिफरी सी,
आंख मे उसके अगले ही पल
गरम मॉस का नरम लोथडा होता है,
इधर उठी हर तकरारे
जिस्मो के झटपट ले दे मे उची सी,
उधर घाव से रिश्ते फूको
दूर गुज़रती आखे देखे रूखी सी,
लेकिन उसको लेके रंग बिरंगे
मेलो मे गुण जाई, शोती है
नशे मे डूबे सेहन से
खूंखार चुटकुलो की पैदाइश होती है
अध नंगे जिस्मो की देखो
लिपि पुट्टी से लगी नुमाइश होती है,
लार टपकते चेहरो को कुछ
शितानी करने की ख्वाहिश होती है,
वो पूछे है हैरान होकर
ऐसा सब कुछ होता है कब,
वो बटलो तो उनको ऐसा तब तब तब तब होता है
जब शेहेर हमारा सोता है
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