ऐसी सज़ा देती हवा, तन्हाई भी तनहा नही
नींदे भी अब सोने गयी , रातो को भी परवाह नही
ऐसे मे बारिश की बूंदो से अपनी, सांसो को सहला भी दो
बढती हवाओ के झोखो से दिल को, नगमा कोई ला भी दो
पलको की कोनो पे बैठी नमी को, धीमे से पिघला भी दो
आआआअयेह ज़िन्दगी ऐसी ही थी, तुमने कभी जाना नही
जीवन की राहो मे आना या जाना, बता के नही होता है
जाते कही है मगर जानते ना, की आना वही होता है
खोने की जिद मे यह क्यो भूलते हो, की पाना भी होता है
वो पल अभी वैसा ही है, छोड़ा था जो जैसा वही
ऐसी सज़ा देती हवा, तन्हाई भी तनहा नही
नींदे भी अब सोने गयी, रातो को भी परवाह नही
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