कैसे मुझे तुम मिल गयी, किस्मत पे आये ना यकीन
उतर आई जीत मे, जैसे चांद उतर ता है
कभी हौले हौले धीरे से
गुण गुनी धुप की तरह से तरंगो मे तुम
छू के मुझे गुज़री हो यू
देखू तुम्हे या मै सुनू, तुम हो सुकून
तुम हो जूनून, क्यू पहरे रात आई तुम
कैसे मुझे तुम मिल गयी, किस्मत पे आये ना यकीन
मै तो ये सोचता था, के आज कल कुछ बताने को
फुर्सत नही फिर भी तुम्हे बनाके वोह
मेरी नज़र मै चढ़ गया, रित पे दुआऔर बन गया
बदले रास्ते झरने और नदी, बदली दीप की तिन तिन
छेड़े ज़िन्दगी धुन कोई नही, बदली बरखा की रिमझिम
बदलेगी ऋतुए अदा, पर मै रहूगी सदा
उसी तरह तेरी बाहो मे बाहे दाल के हर लम्हा हर पल
ज़िन्दगी सितार होगई, रिमझिम मल्हा होगई
मुझे आता नही किस्मत पे अपनी यकीन कैसे मुझको मिली तू
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