मै ने देखा था सपनो मे इक चन्द्रहार
आज बालम ने पहना दिया
हो मुझे उलफत का गहना दिया
बंधी बंधी नदिया सी बहाने लगी
घड़ी घड़ी लहरा के कहने लगी
मै तो साजन से जाकर मिलूंगी अभी
हो ना जाऊ कही प्यार मे बावरी
मै ने देखा था ...
खोई खोई जाऊ मै जाने कहा
मिला मुझे सब कुछ मिले दो जहा
आज मेरी खुशी की तो सीमा नही
आज मुझको मिली है नई ज़िंदगी
मै ने देखा था ...
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