उम्मीद कही कोई दर खोलती नही
जलने के बाद शम्मार बोलती नही
उम्मीद कही कोई दर खोलती नही
जो सांस ले रही है, हर तरफ वोह मौत है
जो चल रही है सिने मे वोह जिंदगी नही
हर एक चीज जल रही है, शहर मे मगर
अंधेरा बढ़ रहा है, कही रोशनी नही
जलने के बाद शम्मार बोलती नही
उम्मीद कही कोई दर खोलती नही
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