मालिक मै पूछता हू मुझे तू जवाब दे
बहते है क्यू गरीब के आंसू जवाब दे
बता मुझे ओ जहा के मालिक ये क्या नज़ारे दिखा रहा है
तेरे समुन्दर मे क्या कमी थी के आदमी को रुला रहा है
बता मुझे ओ
कभी हसाये कभी रुलाये ये खेल कैसा है तू बता दे
जिसे बनाया था अपने हाथो उसी को अब क्यूं मिटा रहा है
बता मुझे ओ
जो खुद ही गम से बुझा-बुझा है तेरा फिर इसमे कमाल क्या है
की एक दीपक की राह मे तू हज़ारो तूफ़ान उठा रहा है
बता मुझे ओ
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