कही चल न दे रात का क्या ठिकाना
इधर आओ जुल्फो मे तुमको छिपा ले
कही देख ले फिर ना हमको ज़माना
कहो तो सितारो के दीपक बुझा दे
ये रात आई है मिल भी लो चुपके-चुपके
गुज़र जाए कब ये ना जाने
नज़र आज मिलाए हम-तुम कुछ ऐसी
ठहर जाए जाते ज़माने
नसीबो से मिलाता है ये सामान
कही देख ले फिर
तेरी ज़ुल्फ़ छू ली तो आवारा बादल
महकने बहकाने लगा है
झुका चांद का सर घटाओ का आंचल
सरकने ढलकने लगा है
तो फिर छेड़ दो दिल की दास्तान
कही चल न दे
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