बर्फ ख़ुशी है सर्द हसी है
क्यो मुस्कराहट जैसे जमी है
कोई जो पूछे क्या क्या कमी है
क्या दिल बताये वोह अजनबी है
एक अजनबी है
ऊची मीनारे लम्बी कतारे
छोटी बहारे क्या यह सही है
कोई जो पूछे क्यो यह सभी है
बोले नज़र क्या वोह अजनबी है
एक अजनबी है..
ऊची मीनारे लम्बी कतारे
छोटी बहारे क्या यह सही है
कोई जो पूछे क्यो यह सभी है
बोले नज़र क्या एक अजनबी है
एक अजनबी है..
ललचाते चेहरे मुस्काते पहरे
तालो पे ताले चाबी नही है
कोई जो पूछे जाते कहा हो
बोले कदम क्या एक अजनबी है
एक अजनबी है..
ललचाते चेहरे मुस्काते पहरे
तालो पे ताले चाबी नही है
कोई जो पूत्चे जाते कहा हो
बोले कदम क्या एक अजनबी है
वोह अजनबी है एक अजनबी है
हा अजनबी है
ऊची मीनारे लम्बी कतारे
ललचाते चेहरे मुस्काते पहरे
आजा है कहते हस्ते ही रहते
कहते है हमसे हम ज़िन्दगी है
बर्फ जमी हो सर्द हसी हो
सीने के अन्दर बसते हो खन्दर
ताले लगे हो जले लगे हो
लगते है यह पल अजनबी है
यह ज़िन्दगी है तोह जीते है कैसे
यह है जो खुशिया तो पीते है कैसे
मुह से बोलू कोई राज़ खोलू
तोह कहती है दुनिया..
कोई तोह कमी है..
एक अजनबी है......
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