खिजा के फूल पेन, आती कभी बहार नही
मेरे नसीब मे ए दोस्त तेरा प्यार नही
न जाने प्यार मे कब मैं, जुबान से फिर जाऊ
मै बन के आंसू खुद अपनी नजर से गिर जाऊ
तेरी कसम है मेरा कोइ, एतबार नही
मै रोज लैब पेन नयी एक आह ताकता हू
मै रोज एक नए गम की राह ताकता हू
किसी खुशी का मेरे दिल को इंतज़ार नही
गरीब कैसे मोहब्बत करे अमीरो से
बिछाद गए है कई रान्ज़े, अपनी हीरो से
किसी को अपने मुकद्दर पे इख्तियार नही
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