दुनिया मे एसा कहा सब का नसीब है
कोइ कोइ अपने पीया के करीब है
दूर ही रहते है, उन से किनारे
जिन को ना कोइ मांजी पार उतारे
साथ है मांजी तो किनारा भी करीब है
चाहे बजा दे कोइ दीपक सारे
परीत बिछाती जाए, राह मे तारे
परीत दीवानी की कहानी भी अजीब है
बरखा की रुत हो या दिन हो बहार के
लगते है सुने सुने, बीन तेरे प्यार के
तू है तो जिन्दगी को जिन्दगी नसीब है
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