आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम
गुज़ारा ज़माना बचपन का
हाय रे अकेले छोड़ के जाना
और ना आना बचपन का
आया है मुझे ...
वोह खेल, वोह साथी , वोह झूले
वोह दौड़ के कहना आ छुले
हम आज तलक भी ना भूले
वोह ख्वाब सुहाना बचपन का
आया है मुझे...
इसकी सब को पहचान नही
यह दो दिन का मेहमान नही
मुश्किल है बहुत आसान नही
यह प्यार भुलाना बचपन का
आया है मुझे...
मिलकर रोये, फ़रियाद करे
उन बीते दिनो की याद करे
ए काश कही मिल जाए कोई
यू मीत पुराना बचपन का
आया है मुझे..
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