बुझा दो दीपक, हू, अन्धेरा कर दो..
उठा दो घूंघट, हाय! सवेरा कर दो
बुझा दो दीपक हू...
बुझा दो दीपक
शर्म के मारे हाथो से ये चेहरा ढाप के..
ना दूर दूर जाओ दर से काप काप के
की अब आओ पास, मेरी प्यास तो मिटा दो
कोई ग़म है तो, हाय! वो मेरा कर दो
बुझा दो दीपक
बदल लो रूप अपना आज मेरे प्यार से..
सजा दो मेरी सूनी सेज को बहार से
ख़ुशी के फूल ग़म की धुल पे बिछा के
इसे खुशियो का, हाय! बसेरा कर दो
बुझा दो दीपक
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