परबत से काली घटा टकराई, पानी ने कैसी ये आग लगाई..
हाय आग लगाई
दिल देने दिल लेने की रुत आयी
परबत से काली घटा टकराई, पानी ने कैसी ये आग लगाई
हे, आग लगाई अ: हाय, आग लगाई
मारे शर्म के, मै तो सिमट गयी,
चुनरी मेरी मुझसे लिपट गयी..
ऐसे मे तुने जो ली अंगडाई
आइसे मे तुने जो ली अंगडाई
आग लगाई
दिल देने दिल लेने की रुत आयी
परबत से काली घटा टकराई, पानी ने कैसी ये आग लगाई
हे, आग लगाई हाय, आग लगाई
मस्ती मे आके, मै झूम लूगा,
रोको मुझे मै तुम्हे चूम लूगा...
मस्ती मे आके, मै झूम लूगा
रोको मुझे मै तुम्हे चूम लूगा
छेड़ो ना मुझको यू छोडो कलाई..
आग लगाई
दिल देने दिल लेने की रुत आयी
परबत से काली घटा टकराई, पानी ने कैसी ये आग लगाई..
आग लगाई
दिल देने दिल लेने की रुत आयी
|
| This lyrics |
Print |
Send / Dedicate to someone |
|
|
|
Related Lyrics
|