मै ससुराल नही जाउगी..
डोली रख दो कहारो
साल दो साल नही जाउगी..
मै ससुराल नही ...
पहला शंदेसा ससुर जी का आया
अच्छा बहाना ये मैने बनाया
बुद्धे ससुर के संग नही जाऊगी
मै ससुराल नही ...
दूजा शंदेसा सासू जी का आया
बुधिया ने हाय राम कितना सताया
उस बुधिया को मै अब सताऊगी
मै ससुराल नही ...
तीजा शंदेसा नन्दनिया आ आया
जिसने इशारो मे मुझको नचाया
उसे घुंघरू मै अब पहनाऊगी
मै ससुराल नही ...
चौथा शंदेसा ननदोई का आया
मै चल पड़ी थी मगर याद आया
इतनी जल्दी मै कैसे मान जाऊगी
मै ससुराल नही ...
पांचवा शंदेसा पीया जी का आया
कोई बहाना ना फिर याद आया
नंगे पाव मै दौड़ी चली जाऊगी
मइके वापस मै लौटकर ना आऊगी
सैया जी से लिपट मै जाऊगी
हू सूनी सेज सजरिया सजाऊगी
बन के बिस्तर मै हाय बिछ जाऊगी
मै ससुराल नही ...
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