लगी आज सावन की, फिर वो जादी है
वही आग सीने मे, फिर जल पडी है
कुछ एसे ही दिन थे, वो जब हम मिले थे
चमन मे नही, फूल दिल मे खिले थे
वही तो है मौसम मगर रुत नही वो
मेरे साथ बरसात भी रो पडी है
कोइ काश दिल पे, ज़रा हाथ रख दे
मेरे दिल के टुकड़ो को, एक साथ रख दे
मगर ये है ख़्वाबो ख्यालो की बाते
कभी टूट कर चीज कोइ जुडी है
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