थकी थकी सी शाम फिर जवान होने लगी
उजालो ने, चुराए है, रात के सब निशां अभी अभी
ज़िन्दगी उड़ रही, बनके धुवा धुवा
कल मिले न मिले, क्या पता कल कहा
आ सवारूं तुझे, के जीलू मै ये.. लम्हा
जब यहां दिल से दिल मिले फिर से प्यार की इक हवा बाहे
बाहे फेलाए आ गए, मिलने को बेक़रारसे
ध्हुन्ध्हते फिरते थे, कौन ये खोज से
बैठे है पेहेलुवो मे एक एक किस्से
हसरते थी किस्सी की, किस्सी की ना हो गयी
थकी थकी सी शाम फिर जवान होने लगी
उजालो ने ये
आसमान से उतरता शोर, चमक रहा है बोर बोर
झिलमिलाती हवी, ये रात गाती हवी
इक सुहागन सी रात, ये सुहाना समा
कल मिले न मिले, क्या पता कल कहा
आओ सवारू तुझे, के जीलूं मै
थकी थकी सी शाम फिर जवान हो गयी... थकी थकी थकी थकी
हो गयी शाम जवान अहा अहा अहा आ हो गयी शाम
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