अपना है फिर भी अपना बढाकर गले लगा ले
अच्छा है या बुरा है अपना उसे बना ले
मत सोच तेरे दिल मे ये कैसी काश-मां-काश है
जो खिंचती है तुझको, वो खून की कशिश है
परदा पडा हुआ है, जो दरमियान उठा ले
अपना है फिर भी
चुप है जुबा फिर भी, अपना लहू पुकारे
तुम एक आसमान के टूटे हुए हो तारे
नज़रे तो मिल गई है, अब दिल से दिल मिला ले
अपना है फिर भी
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