बने हो एक काक से, तो दूर क्या करीब क्या...
लहू का रंग एक है, आमिर क्या गरीब क्या
बने हो एक ...
वो ही जान वो ही तन, कहा तलक छुपाओगे...
पहन के रेशमी लिबाज़, तुम बदल ना जाओगे
के एक जात है सभी..
तो बात है अजीब सी
लहू का रंग एक है...
गरीब है वो इस लिए, तुम आमिर हो गए..
के एक बादशाह हुआ, तो सौ फ़कीर हो गए
खता यहा है समाज की..
भला बुरा नसीब क्या
लहू का रंग एक है ...
जो एक हो तो क्यो ना फिर, दिलो का दर्द बांट लो..
लहू की प्यास बांट लो, रुको की दर्द बांट लो
लगा लो सबा को तुम गले..
हबीब क्या, रकीब क्या
लहू का रंग एक है ...
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