नज़ारा है, कुछ खोयी खोयी यादो का,
नज़ारा है, कुछ भूले से ख्यालो का,
आंखो मे पल रहा, हर घडी खल रहा,
रुके ना रुके न बस हर घडी चल रहा
नज़ारा है, ही
कोई अनदेखी तस्वीर का, नज़ारा है, ही
कोई नशा है, सजा है, क्या यह भला है, खता है,
बीते पल के कतरो का, ऐसे वैसे खतरो का,
सोये हुए थे जो अब तक, उन सारे बरसो का
नज़ारा है, ही
कोई अनदेखी तस्वीर का, नज़ारा है, ही
कैसा समा है, खुमा है, थोडा धुआ सा यहा है,
जैसे कोई ख्वाब सा, बहकी कोई राह का,
बिखरे हुए कुछ अनजाने से किस्सो का कैसा
नज़ारा है, ही
कोई अनदेखी तस्वीर का, नज़ारा है, ही
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